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देश का प्रथम हैप्पीनेस इंडेक्स जारी हुआ


  • भारत का प्रथम हैप्पीनेस इंडेक्स जारी हुआ जिसमें सबसे खुश राज्य में पंजाब और गुजरात  ने  स्कोर किया।
  • सबसे खराब  स्कोर करने में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ 10 राज्य हैं।
  • कुंवारों से ज्यादा खुश परिणीत लोग है। भारत का प्रथम हैप्पीनेस इंडेक्स जारी हुआ इस स्टडी में 16950 लोगों ने भाग लिया था। इसका रिजल्ट बताता है कि वैवाहिक स्थिति, उम्र, शिक्षण और कमाई का सकारात्मक सीधा संबंध खुशी के साथ है।
  • हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर असले  विलीयंस ने बताया कि जो लोग पैसों से ज्यादा समय को महत्व देते हैं वह लोग सबसे ज्यादा खुश है।
  • देश के प्रथम हैप्पीनेस इंडेक्स के अनुसार मिजोरम,अंदमान निकोबार,और पंजाब यह तीन राज्यों के लोग सबसे ज्यादा खुश रहते हैं। 
  • बजे राज्य में पंजाब,गुजरात और तेलंगाना आगे है, और छोटे राज्यों में सिक्किम,मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश आगे है।
  • खराब स्कोर करने वाले 10 राज्यों में मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर ,तमिलनाडु ,नागालैंड, राजस्थान ,गोवा, मेघालय ,छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और गोवा है। यह राज्यों का क्रमशः रैंकिंग 27 से 36 तक का है।
  • यह स्टडी IIM और IIT मैं प्रोफेसर रह चुके राजेश पिलानिया के नेतृत्व में मार्च 2020 से जुलाई 2020 के बीच में एक करने में आया है। यह स्टडी में 16950 लोगों ने भाग लिया था।
  • अविवाहित लोगों की  तुलना में विवाहित लोग सबसे ज्यादा खुश है। यह स्टडी में यह दिखने मिला कि कोरोना के चलते लोगों की स्थिति में क्या प्रभाव आया? 
  • हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर असले विलियंस बताते हैं कि जो लोग पैसों से ज्यादा समय को महत्व देते हैं, वह लोग सबसे ज्यादा खुश रहते हैं। महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली की खुशी पर कोरोना ने सबसे ज्यादा असर की है।
  • पांडिचेरी और जम्मू-कश्मीर के लोगों पर कोरोना की कोई असर दिखने नहीं मिली है। जबकि मणिपुर अंदमान निकोबार द्वीप और लक्षद्वीप में इस समय में लोग आशावादी बने हैं।
  • इस स्टडी के निष्कर्ष में स्टैनफोर्ड के नामांकित इंस्टिट्यूट के साइंस डायरेक्टर डॉक्टर इम्मा सेपाला ने बताया कि दयालु और धैर्यवान लोग सबसे ज्यादा खुश और प्रसन्न रहते है।

नीचे दिए गए पांच पैरामीटर पर बना है हैप्पीनेस इंडेक्स:
  1. काम से संबंधित मुद्दे जैसे की कमाई और ग्रोथ
  2. पारिवारिक संबंध और मित्रता
  3. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य
  4. सामाजिक मुद्दे और परोपकार
  5. धर्म और आध्यात्मिक बंधन




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