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संयुक्त राष्ट्र विज्ञान ने 2020 में रिपोर्ट जारी की जिसके अनुसार ग्लोबल वार्मिंग की वजह से विश्व का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है


  • इस रिपोर्ट के डाटा के अनुसार दुनिया के जापान में 5 से 10 साल में और भी अधिक होने का अनुमान है, यह रिपोर्ट वैश्विक तापमान को घटाने के लिए विश्व के सभी नेताओं को और देशों को ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करता है। 
  • ग्लोबल वार्मिंग काम करने के लिए तथा एनवायरमेंट को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग देशों द्वारा तथा अलग-अलग सहयोग संगठन द्वारा विभिन्न प्रकार के समझौते किए जाते हैं। 
  • 2015 में वैश्विक मंच द्वारा वैश्विक नेताओं ने जलवायु परिवर्तन के सम्मेलन में पेरिस समझौता किया था जिसके अनुसार विश्वा का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक नियंत्रित करने का सुझाव रखा था। 
  • पेरिस समझौते के तहत यह तय किया गया था कि विश्व के सभी देश ग्लोबल वार्निंग को कम करके तथा अन्य प्रकार के प्रयास करके वैश्विक तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने से रोकने का भरपूर प्रयास करेंगे। 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान को नियंत्रित करने के लिए इस समझौते में सभी देशों ने सहमति जताई है। इस रिपोर्ट के अनुसार आने वाले 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान को नियंत्रित करना काफी मुश्किल होगा। 


वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी होने की सामान्य वजह:
  • बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग तथा औद्योगिक द्वारा कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे वायु का उत्सर्जन को जवाबदार मारा जाता है। इसके अलावा प्राकृतिक घटनाओं द्वारा पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर बुरा असर पड़ा है। 
  • यह साल आमतौर पर सभी देशों में पहले से ज्यादा गर्मी महसूस की जा सकती है, इस साल की शुरुआत में डेथ वैली में तापमान लगभग 54.4 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था, साइबेरिया में तापमान का रिकॉर्ड तोड़ते हुए इस साल यहां पर तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था। 
  • इस साल कई प्राकृतिक आपदा भी इस तापमान बढ़ोतरी के लिए जवाबदार हैं जिनमें, अटलांटिक में आए हुए तूफान  जो 16 और 17 की तूफान के नाम से नया रिकॉर्ड दर्ज कराते हैं, इसके अलावा कैलिफ़ोर्निया जंगलों में लगी आग तथा ऐमेज़ॉन जंगलों में लगी आग को भी इस जापान बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार वाजह माना जाता है। 


रिपोर्ट के बारे में सामान्य जानकारी:
  • या रिपोर्ट में उच्च स्तरीय जलवायु परिवर्तन विज्ञान की महत्वपूर्ण जानकारी और अध्ययन का संकलन किया गया है। इस रिपोर्ट बनाने में मुख्य सहायक के तौर पर कोई संगठन ने भी अपना योगदान दिया है, जिनमें विश्व मौसम संगठन को मुख्य माना जाता है। 
  • इसके अलावा ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम,यूनेस्को इंटरगवर्नमेंटल ओशनोग्राफी कमीशन और मेट ऑफिस के सहयोग से यह रिपोर्ट तैयार किया गया है। 
  • इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 साल के आंकड़ों को ध्यान पर रखकर 2016 से 2020 में औसत वैश्विक तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस के करीब होने की संभावना है,औद्योगिक क्रांति के पहले 1850 से 1950 तक यह वैश्विक तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा था। 
  • ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग, कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में आग और अमेजॉन के जंगल में लगी आग तथा गर्म हवाओं ने और शुष्क प्रदेशों ने वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी करने के लिए योगदान दिया है। 
  • पिछले बीते हुए 4 सालों में सबसे बड़े आर्थिक 3 नुकसान ओं में जंगलों में लगी आग को जिम्मेदार माना जाता है। कोरोना वायरस महामारी के दौरान औद्योगिक औद्योगिक को एक बंद होने से अथवा औद्योगिक क्रांति के कम होने से पर्यावरण पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ा है जिसके वजह से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 4% से 7% की भारी गिरावट दर्ज होने का अनुमान है। 
  • 2020 में ग्रीन हाउस उत्सर्जन में उत्सर्जन में कमी होने से ग्रीन हाउस इफेक्ट का असर कम होगा। जो ग्रीन हाउस वायु की सांद्रता में सामान्य गिरावट डालेगा। 
  • 2019 के आंकड़ों के हिसाब से कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका था जिसे 36.7 गीगा न दर्ज किया गया था, जो पिछले 1990 के रिकॉर्ड के हिसाब से 62% की बहुत बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की थी। 


संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के बारे में सामान्य जानकारी: 
स्थापना - 1972 में
हेड क्वार्टर - नैरोबी, केन्या
अध्यक्ष - इंगर एंडरसन
माता-पिता संगठन - संयुक्त राष्ट्र संगठन
मुख्य कार्य - पर्यावरण के आरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के कदम उठाना और रिपोर्ट तैयार करना






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