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बिल ऑफ राइट्स Bill of rights kya tha?

बिल ऑफ राइट्स Bill of rights kya tha?

प्रमुख सुधार निम्न थे
(1) बिल ऑफ राइट्स- 1689 ई. में जब विलियम आर भेंट किया गया तो उन्हें अधिकारों की घोषणा कारखा अधिकारों की घोषणा 1689 ई. के ‘बिल ऑफ राइट्स’ के रूप द्वारा कानून तथा न्याय सम्बन्धी कठिनाइयाँ दूर हुई और सर का स्वतन्त्रता की रक्षा हुई। इसमें उन सभी शता का उल्ल अनुसार इग्लेण्ड के सम्राट को शासन करना था। यह घोषणा म एक महान् चार्टर के रूप में माना जाता है, जिसका मा का था। इस घोषणा-पत्र की अग्रलिखित धाराए जप विलियम और मेरी को इंग्लैण्ड का सिंहासन । घोषणा की रक्षा की शपथ लेनी पड़ी और इट्स’ के रूप में परिवर्तित हुई। इसक हुइ और संसद के अधिकार तथा जना का उल्लेख किया गया था जिसकी यह घोषणा-पत्र इंग्लैण्ड के इतिहास सका महत्व मैग्नाकार्टी से किसी भी
(i) राजा को संसद की स्वीकृति के बिना कर लगाने का अधिकार नहीं है।
(ii) किसी कानून को स्थगित करने, किसी व्यक्ति को किसी कानूनी अपराध से बरी करने तथा हाई-कमीशन कोर्ट जैसा विशेष प्रकार का कोर्ट स्थापित करने के लिए राजा को कोई अधिकार नहीं होगा।
(iii) संसद में भाषण देने तथा बहस करने की स्वतंत्रता होगी और इसके कारण न्यायालय में किसी प्रकार का मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा | कानून बनाने के लिए लोगों की शिकायत दूर करने हेतु संसद की बैठक बहुधा होती रहनी चाहिए ।
(iv) जब तक किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपराध सिद्ध न हो जाए उस समय तक उसे जुर्माने, माल जब्त करने आदि की धमकी देना अवैध है।
(v) पार्लियामेन्ट का स्वतंत्र निर्वाचन होना चाहिए तथा उसका नियमित अधिवेशन होना चाहिए।
(vi) विलियम तथा मेरी को संयुक्त रूप से इंग्लैण्ड का ताज भेंट किया जाता है। (vii) राजा संसद की स्वीकृति के बिना सेना नहीं रख सकेगा।
(viii) विलियम तथा मेरी के पश्चात् उनकी संतान और उसके अभाव में मेरी की बहन एन को तथा उसके पश्चात् एन की संतान को तथा उसके अभाव में विलियम की अन्य पलियों से उत्पन्न संतान को इंग्लैण्ड की राजगद्दी का अधिकार प्राप्त होगा।

अंग्रेजों की स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण प्रलेख

यह घोषणा पत्र अंग्रेजों की स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण प्रलेख समझा जाता है। इस घोषणा-पत्र द्वारा निरंकुश राजतंत्र का अन्त होकर एक संवैधानिक राजतंत्र का जन्म हुआ। मैग्नाकार्टा के द्वारा जो वैधानिक कार्य प्रारम्भ हुआ था, उसे इस घोषणा-पत्र ने पूरा कर दिया। अधिकारों का घोषणा-पत्र इंग्लैण्ड के संवैधानिक विकास का चरमोत्कर्ष है, क्योंकि उसने दो मौलिक तत्वों की घोषणा की-प्रथम, देश के कानून की सर्वोच्चता तथा द्वितीय, राष्ट्र की सर्वोच्चता । ये दोनों तत्व संविधान की जड़ें हैं।

(2) त्रिवार्षिक अधिनियम-

1694 ई. में संसद ने यह अधिनियम पारित किया। इसके अनुसार संसद का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया। तीन वर्ष पश्चात् सम्राट को यह अधिकार दिया गया कि वह अपनी मोहर द्वारा नई संसद के चुनावों की आज्ञा प्रकाशित करे | इस अधिनियम द्वारा पिछले लम्बे समय में काफी अवधि तक चलने वाली संसद की बैठकें समाप्त कर दी गयीं। अब कोई भी सम्राट अपनी समर्थक संसद को निर्धारित समय से अधिक काल तक बनाये नहीं रख सकता था।

(3) उत्तराधिकार निर्णायक अधिनियम-

1701 में पारित हुए उत्तराधिकार निर्णायक अधिनियम का मुख्य उद्देश्य इंग्लैण्ड के सिंहासन के उत्तराधिकार का निर्णय करना था। 1689 ई.में विलियम और मेरी को संयुक्त रूप से सिंहासन भेंट किया गया था परन्तु 1701 में उत्तराधिकार की समस्या उपस्थित हो गयी। 1694 , में मेरी की मृत्यु के बाद विलियम अकेला पड़ गया था, वह निःसंतान था साथ ही बूढ़ा हो चला था। एन का पुत्र भा. मर गया था। संसद को डर था कि एन की मृत्य के बाद इंग्लैण्ड के सिंहासन का काई भी उत्तराधिकारी नहीं रह जायेगा । अतः 1701 ई. में संसद ने उत्तराधिकार निर्णायक तान को इंग्लैण्ड के राज पोटेस्टेन्ट उत्तराधिकारिगी रह यही कारण था कि 1714 प्रथम (1714-1727 ई.) इंग्लैण्ड के उत्तराधिकार निर्णायक अधिनियम पारित कर हेनोवर की सोफिया तथा उसकी सिंहासन का उत्तराधिकारी बनाया । सोफिया ही एकमात्र प्रोटेस्टेन्टर गयी थी, जो स्टुअर्ट वंश के जेम्स प्रथम की पौत्री थी। यही कारण रानी एन की मृत्यु के बाद हेनोवर वंश का जार्ज प्रथम (1714-17 सिंहासन पर बैठा, क्योंकि सोफिया की मृत्यु हो चुकी थी। उतराधिकार निर्मा (1701 ई.) ने एक बार पुनः संसद की सर्वोच्चता घोषित कर दी। अब हो गया कि राजगद्दी का अधिकारी संसद के नियमानुसार होगा और साथ ही समा संवैधानिक शासक होगा। 1714 ई. के पश्चात् संसदीय संस्थाओं के बढ़ते चरण 1714 ई. अर्थात् हेनोवर काल (1714-1789 ई.) से संसदीय संस्थाओं का उत्तारोमा विकास होता गया तथा संसद जनतांत्रिक संस्था कहलाने योग्य बनी। इस संदर्भ में निम्न तथ्य उल्लेखनीय रहे:

(क) राजा की वास्तविक शक्तियों का पतन-

राजपद पर संसद की सर्वोच्चता 1639 ई. के अधिकार-पत्र से ही स्थापित हो गयी थी, किन्तु हेनोवर वंश के सिंहासनारूड़ होने के पहले तक राजा का मन्त्रियों की नियुक्ति और पदमुक्ति में पर्याप्त हाथ रहता था। हेनोवर काल से राजा के इस अधिकार का पतन होता गया और वे पार्लियामेन्ट के इस में पहुंच गये । जार्ज तृतीय के शासनकाल (1760-1820 ई.) में अधिकारों का कुछ अशा में पुनर्जीवन हुआ किन्तु वह अस्थायी सिद्ध हुआ और विलियम चतुर्थ (1850-100 इ.) के समय से राजा के अधिकारों का क्रमिक हास होता गया। साम्राज्ञा वा (1837-1901 ई.) तक आते-आते सम्राट एक संवैधानिक शासक मात्र रहा गया।

(ख) मन्त्रि-मण्डलीय प्रणाली का विकास-

हेनोवर काल के पूर्व तक की बैठकों की अध्यक्षता सम्राट ही करता था और मन्त्रिमण्डल का पूर्ण विकास पाया था । हेनोवर काल में कैबिनेट-प्रणाली का उदय सम्भव हुआ कारण तत्कालीन शासकों का विदेशी मूल का होना था। मूलतः जमना लोग इंग्लैण्ड की प्रशासनिक-व्यवस्था, संसदीय कार्य-प्रणाली से अपारापन मता अग्रेजी भी नहीं जानता था। प्रथम दो हेनोवर शाम मूलतः जर्मन होने के कारण प्रणाली से अपरिचित थे अतः विशेष सक्रिय नहीं थे। जार्ज प्रथम तो अंग्रेजी भी नहीं जानता था। अब जाज प्रथम (1714-1727 ई.) एवं जार्ज दितीय (1727-1760ई.) शासन का उदासान था कि उन्होंने मन्त्रिमण्डल की अध्यक्षता करना भी छोड़ दिया आधकाश कार्य अपने सबसे विश्वासपात्र मन्त्री को सौंप दिये। यहाँ तकाक की नियुक्ति और मुक्ति भी उसी विश्वस्त मन्त्री की सलाह पर करनल मन्त्री ने धीरे-धीरे प्रधानमन्त्री का रूप धारण कर लिया और उसने प्रति उत्तरदायी होने तथा प्रशासन को अपने हाथ में केन्द्रित कर समी मन्त्रियों के लिए प्रधानमन्त्री का नेतृत्व स्वीकार करने का अथ नीति का पालन करते हो अर्थात् एक दल के सदस्य हो। हनाव कायन हुआ। इस प्रकार परिस्थितिवश इस समय 1700 ई.) शासन के प्रति इतने मा छोड़ दिया और अपने पहा

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